सपनों का बाज़ार: भारत में उस चीज़ का व्यापार, जो अस्तित्व में है ही नहीं

Regular price Rs. 199.00
Sale price Rs. 199.00 Regular price
Tax included.
167 people are viewing this right now
Shipping Date Example
Delivery by Sat, August 28
USA flag
FREE India Shipping

सपनों का बाज़ार: भारत में उस चीज़ का व्यापार, जो अस्तित्व में है ही नहीं

Product description

जिस देश में UPI से रिकॉर्ड भुगतान होते हैं, वहीं करोड़ों रुपये कुंडली, कोचिंग के विज्ञापनों और रातों-रात अमीर बनाने वाले ऐप्स पर क्यों ख़र्च होते हैं?

सपनों का बाज़ार भारत के उस बाज़ार की आँकड़ों पर आधारित पड़ताल है जो वादे बेचता है: ऐसी चीज़ें जिनके लिए लोग असली पैसा देते हैं, पर जिन्हें न तौला जा सकता है, न परखा जा सकता है और न लौटाया जा सकता है। पुस्तक का केंद्रीय तर्क सीधा है: व्यापार असली है, वादा काल्पनिक।

इस 25 पृष्ठ की पुस्तक में

  • डिग्री का सपना: शिक्षा बढ़ने के बावजूद युवा बेरोज़गारी क्यों बढ़ रही है
  • भाग्य की दुकान: ज्योतिष कैसे तेज़ी से बढ़ता ऑनलाइन कारोबार बना
  • आशीर्वाद का अर्थशास्त्र: महाकुंभ के आँकड़े क्या बताते हैं और क्या नहीं
  • एक रात में अमीर: 2025 के ऑनलाइन गेमिंग प्रतिबंध के पीछे का तर्क
  • ग़रीबी और सपनों का रिश्ता: ग़रीब मूर्ख नहीं हैं, और सपना कारण नहीं, लक्षण है
  • असली और काल्पनिक बाज़ार में फ़र्क़ करने की चार प्रश्नों की कसौटी
  • सपनों से यथार्थ तक: नीति और पाठक, दोनों के लिए छह व्यावहारिक सुझाव

यह पुस्तक किनके लिए है
विद्यार्थी और अभिभावक, कामकाजी पेशेवर, अर्थशास्त्र और नीति में रुचि रखने वाले पाठक, और वे सभी जो किसी वादे के लिए पैसा देने से पहले बेहतर सवाल पूछना चाहते हैं।

पुस्तक का विवरण
प्रारूप: PDF (डिजिटल डाउनलोड) | पृष्ठ: 25 | भाषा: हिंदी | लेखक: गोपाल एम

Shipping & Return

Shipping cost is based on weight. Just add products to your cart and use the Shipping Calculator to see the shipping price.

We want you to be 100% satisfied with your purchase. Items can be returned or exchanged within 30 days of delivery.